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किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र के निर्माण में मौलिक अधिकार तथा नीति निर्देश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य के नीति निर्देशक तत्व (directive principles of state policy) जनतांत्रिक संवैधानिक विकास के न्यूनतम तत्व हैं। भारतीय संविधान के भाग 3 तथा 4 मिलकर संविधान की आत्मा तथा चेतना कहलाते है इन तत्वों में संविधान तथा सामाजिक न्याय के दर्शन का वास्तविक तत्व निहित हैं। 

मौलिक अधिकार भारत के संविधान के तीसरे भाग में वर्णित भारतीय नागरिकों को प्रदान किए गए वे अधिकार हैं जो सामान्य स्थिति में सरकार द्वारा सीमित नहीं किए जा सकते हैं और जिनकी सुरक्षा सर्वोच्च न्यायालय करता है। ये अधिकार सभी भारतीय नागरिकों को सामान अधिकार प्रदान करता हैं| मौलिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अतिक्रमण करने से रोकने के साथ साथ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने का दायित्व सरकार पर डालता हैं। संविधान द्वारा मूल रूप से 7 मौलिक अधिकार थे परन्तु वर्तमान में 6 ही मौलिक अधिकार हैं

  1. समानता का अधिकार 
  2. स्वतंत्रता का अधिकार 
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. धर्म का अधिकार
  5. संस्कृति एवं शिक्षा की स्वतंत्रता का अधिकार
  6. संपत्ति का अधिकार
  7. संवैधानिक उपचारों का अधिकार

हालांकि, संपत्ति के अधिकार को 1978 में 44वें संशोधन द्वारा संविधान के तृतीय भाग से हटा दिया गया था




समानता का अधिकार 
अनुच्छेद 14 से 18 के अंतर्गत भारतीय नागरिकों को निम्न अधिकार प्राप्त हैं-
  1. कानून के समक्ष समानता।
  2. जाति, लिंग, धर्म, तथा मूलवंश के आधार पर सार्वजनिक स्थानों पर कोई भेदभाव करना इस अनुच्छेद के द्वारा वर्जित है। लेकिन बच्चों एवं महिलाओं को विशेष संरक्षण का प्रावधान है।
  3.  सार्वजनिक नियोजन में अवसर की समानता प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है परंतु अगर सरकार जरूरी समझे तो उन वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान कर सकती है जिनका राज्य की सेवा में प्रतिनिधित्व कम है।
  4.  इसके द्वारा  बिट्रिश सरकार द्वारा दी गई उपाधियों  का अंत कर दिया गया। सिर्फ शिक्षा एवं रक्षा में उपाधि देने की परंपरा कायम रही।


स्‍वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद (19-22) के अंतर्गत भारतीय नागरिकों को निम्न अधिकार प्राप्त हैं-
  1. बोलने की स्‍वतंत्रता आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण। जमा होने, संघ या यूनियन बनाने, आने-जाने, निवास करने और कोई भी जीविकोपार्जन एवं व्‍यवसाय करने की स्‍वतंत्रता का अधिकार।
  2. अपराधों के लिए अपना पक्ष रखने के संबंध में संरक्षण।
  3. प्राण और दैहिक स्‍वतंत्रता का संरक्षण।
  4. शिक्षा का अधिकार
  5. कुछ स्तिथि में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण।


शोषण के विरुद्ध अधिकार
अनुच्छेद (23-24) के अंतर्गत निम्न अधिकार वर्णित हैं-
  1. मानवऔर बालश्रम का प्रतिषेध।
  2. कारखानों आदि में 14 वर्ष तक बालकों के नियोजन का प्रतिषेध।
  3. किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक शोषण प्रतिषेध।

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद(25-28) के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार वर्णित हैं, जिसके अनुसार नागरिकों को प्राप्त है-
  1. दहसंस्कार और धर्म की अबध्य रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्‍वतंत्रता। इसके अन्दर सिक्खों को किरपाण (तलवार) रखने कि आजादी प्राप्त है 
  2. धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्‍वतंत्रता।
  3. कुछ शिक्षण संस्‍थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्‍वतंत्रता।


मौलिक अधिकार के कुछ विशेष तत्व 
  1. मौलिक अधिकार यू. एस. ए. के संविधान से लिया गया है | 
  2. इसे लागू करने के लिए न्यायालय जाया जा सकता है | 
  3. मौलिक अधिकार का वर्णन संविधान के भाग 3 में किया गया है | 
  4. मौलिक अधिकार व्यक्ति के अधिकार के लिए है | 
  5. मौलिक अधिकार को कानूनी मान्यता है | 
  6. ये अधिकार नागरिकों को स्वतः मिल जाता है | 
  7. यह सरकार के महत्व को घटाता है | 


 

नीति निर्देश

अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति निर्देश तत्व किसी न्यायालय मे लागू नही करवाये जा सकते यह तत्व वैधानिक न होकर राजनैतिक स्वरूप रखते है। नीति निर्देश मात्र राज्य के लिये ऐसे सामान्य निर्देश है कि राज्य कुछ ऐसे कार्य करे जो राज्य की जनता के लिये लाभदायक हो। इन निर्देशों का पालन कार्यपालिका की नीति तथा विधायिका की विधियाँ से हो सकता है। इसमें अभी तक 4 बार संशोधन हो चुका है 42,44,86 और 97

भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक के कुछ तत्त्व

  1. राज्‍य लोक कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा
  2. राज्‍य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्‍व: समान न्‍याय और नि:शुल्‍क विधिक सहायता
  3. ग्राम पंचायतों का संगठन
  4. कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार
  5. काम की न्‍यायसंगत और मानव की उचित विकास करना तथा प्रसूति सहायता का उपबंध
  6. कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि : उद्योगों के प्रबंध में कार्मकारों का भाग लेना
  7. नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता
  8. बालकों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध
  9. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्‍य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि
  10. पोषाहार स्‍तर और जीवन स्‍तर को ऊंचा करने तथा लोक स्‍वास्‍थ्‍य को सुधार करने का राज्‍य सरकार का कर्तव्‍य
  11. कृषि और पशुपालन का संगठन : पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन और वन तथा वन्‍य जीवों की रक्षा
  12. राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍मारकों, स्‍थानों और वस्‍तुओं का संरक्षण देना
  13. कार्यपालिका से न्‍यायपालिका का पृथक्‍करण
  14. अंतरराष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि


मौलिक अधिकारके कुछ विशेष तत्व 
  1. नीति निर्देश, आयरलैंड के संविधान से लिया गया है | 
  2. इसका वर्णन संविधान के भाग 4 में किया गया है | 
  3. इसे लानू करने के लिए न्यायालय नहीं जाया जा सकता | 
  4. नीति निर्देश राजनीतिक गतिविधि है | 
  5. यह सरकार के अधिकारों को बढ़ाता है | 
  6. यह राज्य सरकार के द्वारा राज्य में लागू करने के बाद ही जागरिक को इसका लाभ प्राप्त होता है | 
  7. यह समाज के भलाई के लिए होता है | 










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