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हजारीबाग जिला उत्तरी छोटानागपुर डिवीजन के उत्तर पूर्व भाग में स्थित है। हजारीबाग जिला की सीमा में उत्तर में गया (बिहार) और कोडरमा, पूर्व में गिरिडीह और बोकारो, दक्षिण में रामगढ़ और पश्चिम में चतरा जिले शामिल हैं। यह क्षेत्र कई पठारों, पहाड़ों और घाटियों से भरा हुआ है। हज़ारीबाग में लगभग 1325 गांव, 1 नगर निगम एवं 17 पुलिस  स्टेशन है | हजारीबाग के मुख्य पर्वत चांदवाड़ा और जिलिंजा हैं और इनकी ऊंचाई क्रमश: 2816 और 3057 फीट है। इस जिले की प्रमुख नदियाँ दामोदर और बराकर हैं। इस जिले का लगभग 45% क्षेत्र वन क्षेत्र है। 


परिवहन:
सड़क मार्ग: सड़क मार्ग से भी हजारीबाग पहुंचना आसान है। यहां से बसों और टैक्सियों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 33 तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह NH-100, NH-33 के माध्यम से GT रोड से जुड़ा है। राज्य की राजधानी रांची से एक घंटे में हजारीबाग पहुंचा जा सकता है. फोर लेन सड़क होने से यात्रा का आनंद और समय बढ़ गया है। घाटियों से गुजरने के कारण जंगल यात्रा के आनंद को बढ़ा देते हैं। सड़क मार्ग से भी कई जगहों पर आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

बस सेवाएं: हजारीबाग में दो बस स्टेशन है जहां रांची, कोलकाता, धनबाद, पटना जमशेदपुर, देवगढ़, गया आदि जैसे प्रमुख शहरों के लिए सीधी बसें हर समय उपलब्ध हैं।

रेलवे: रांची-वाराणसी एक्सप्रेस, मुरी एक्सप्रेस और शक्तिपुंज एक्सप्रेस से पर्यटक आसानी से हजारीबाग पहुंच सकते हैं। सभी ट्रेनें हजारीबाग रोड रेलवे स्टेशन से होकर गुजरती हैं। वर्तमान में हजारीबाग भी रेलवे स्टेशन बन गया है, जो कोडरमा रेल लाइन से जुड़ा है। कोडरमा ही हावड़ा-दिल्ली रेल लाइन पर स्थित एक स्टेशन है। इसलिए यहां दिल्ली, कोलकाता के लिए मुश्किल नहीं है। आने वाले दिनों में हजारीबाग रेलवे लाइन से रेलवे जंक्शन संपर्क किया जाएगा। यह रांची और, भुवनेश्वर और दक्षिण के अन्य शहरों को भी जोड़ेगा।

हवाई मार्ग: हजारीबाग पहुंचने के लिए वायुमार्ग एक बढ़िया विकल्प है। लेकिन हवाई मार्ग से यहां पहुंचने के लिए आपको पहले रांची एयरपोर्ट पहुंचना होगा। रांची से हजारीबाग की दूरी
91 किमी है, जिसे बसों या निजी वाहनों में डेढ़ घंटे में जाया जा सकता है।


शिक्षा:
हजारीबाग में विनोवा भावे विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। हजारीबाग की ठंडी जलवायु और शांत वातावरण विधार्थीओ को शहर में आकर्षित करता है, और अब यह झारखंड का शिक्षा केंद्र बन गया है। हजारीबाग में 2 मेडिकल कॉलेज जो इस जिला में विद्यार्थियों का आकर्षण का केंद्र है | शहर की सीमा के भीतर विनोबा भावे विश्वविद्यालय है, जिसका नाम सेंट विनोबा भावे के नाम पर रखा गया है। यह झारखंड का दूसरा सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। कोलंबिया कॉलेज, जिसे पहले डबलिन यूनिवर्सिटी मिशन कॉलेज के नाम से जाना जाता था, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग की एक इकाई है। 

हजारीबाग पूरे झारखंड का पुलिस प्रशिक्षण केंद्र है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की भी बड़ी मौजूदगी है। पूर्वी भारत का सबसे बड़ा प्रशिक्षण केंद्र यहां पहाड़ी इलाके के जंगल में है। झील के पास शहर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल भी मौजूद है।


अर्थव्यवस्था: लोगों की अर्थव्यवस्था जंगल, कृषि और खनिजों के इर्द-गिर्द घूमती है।

कृषि:
जिला की ज्यादातर संख्या कृषि कार्यों में लगे हुए हैं। धान, मक्का, अनाज, गेहूं, तिलहन आदि की खेती आम है। लोग या तो खेतिहर मजदूर या किसान के रूप में काम कर रहे हैं। खरीफ और रब्बी मुख्य कृषि मौसम हैं। 


जंगल:
4302 वर्ग किमी के कुल भौगोलिक क्षेत्र में से, लगभग 2566 वर्ग किमी वन क्षेत्र में फैला है। जनजातीय अर्थव्यवस्था वन उत्पादों, उत्पादों और छोटे उत्पादों के उपयोग के इर्द-गिर्द घूमती है। केंदू के पत्ते, बांस और इसके निर्मित उत्पाद, महुआ, फल, पत्ते (दोना, पत्तल बनाने में प्रयुक्त) आदि लोगों की आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोग भोजन के लिए जानवरों का शिकार भी करते हैं।

खान और खनिज:
भूवैज्ञानिक रिपोर्टों का कहना है कि जिला विभिन्न खनिज भंडारों में बहुत समृद्ध है। यहां कोयला, बॉक्साइट, लेटराइट, डोलोमाइट और ग्रेफाइट आदि का प्रचुर भंडार है। ग्रेनाइट, क्वार्ट्ज, फायरक्ले, फेलस्पार आदि। इन खनिजों के उत्खनन और अन्वेषण प्रदेश के निवासियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं | 



संस्कृति और विरासत
हजारीबाग कला और संस्कृति में समृद्ध है जो इस क्षेत्र की हस्तशिल्प वस्तुओं और परंपराओं में परिलक्षित होता है। इसकी संस्कृति समृद्ध, विविध और अद्वितीय है। हजारीबाग को पूर्व-ऐतिहासिक काल से अपनी प्रसिद्ध कला "मुरल पेंटिंग" मिली। हजारीबाग से पाषाण युग के औजारों की खोज की गई थी। हजारीबाग अपने आदिवासी कला रूप के लिए भी प्रसिद्ध है।

धर्मों
हिंदू धर्म हजारीबाग का प्रमुख धर्म है। अधिकांश लोग हिंदू धर्म का पालन करते हैं। यहां मौजूद अन्य प्रमुख धर्म इस्लाम, सरना और ईसाई धर्म हैं। जैन, सिख और बौद्ध तथा अन्य बुनियादी धर्म हैं जिनका पालन हजारीबाग के लोग करते हैं। हिंदू प्रधान क्षेत्र होने के कारण हजारीबाग में कुछ बहुत प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों की उपस्थिति देखी जा सकती है। हजारीबाग और उसके आसपास के कुछ बहुत प्रसिद्ध मंदिर नरसिंहस्थान मंदिर, रजरप्पा, भद्रकाली मंदिर और कई अन्य हैं। हजारीबाग के पास एक प्रसिद्ध जैन मंदिर पारसनाथ मंदिर भी मौजूद है।

बोली
शहर में बोली जाने वाली भाषाएँ हिंदी, संथाली और अन्य आदिवासी भाषाएँ हैं। हिंदी शहर के निवासियों द्वारा बोली जाने वाली एक आम भाषा है। सभी सरकारी संचार, विज्ञापन, मीडिया संचार और सार्वजनिक गतिविधियाँ हिंदी में की जाती हैं। शैक्षिक संस्थानों और व्यावसायिक संचार के लिए अंग्रेजी भी एक औपचारिक भाषा है। हजारीबाग की प्राथमिक जनजातिय भाषा खोरठा है। इसके अलावा यहाँ लोग संथाली, मुंडारी भाषा का भी खुब प्रयोग किया जाता है | 

   

व्यंजनों
हजारीबाग अपने स्ट्रीट फूड के लिए प्रसिद्ध है जिसमे शाकाहारी और मांसाहारी दोनों सामिल है। चावल के साथ दाल, सब्जी यहां के लोगों का मुख्य आहार है। कचौरी, समोसा और धुस्का के साथ छोले, चटनी यहाँ का रोचक स्नैक्स हैं। मांसाहारी भोजन के रूप में यहाँ लोग चिकन, मटन और मछली खाना पसंद करते है | यहाँ के लोग मसाले दार खाना पसंद करते है और इसका स्वाद उत्तर भारत में मिलने वाले स्वाद से बहुत अलग है।


लोक गीत और नृत्य
लोक संगीत और नृत्य हजारीबाग में आदिवासी संस्कृति का हिस्सा हैं। लोग मौसम के अनुसार खुली जगहों पर गाते और नाचते हैं। इस क्षेत्र में झूमर, डोमकच, जदुर, संथाल, छो, कर्मा, नचनी, नटुआ, अग्नि, मठ, सोहराई आदि प्रमुख एवं लोकप्रिय लोक नृत्य हैं । 
छोउ: यह भी एक बहुत लोकप्रिय आदिवासी नृत्य है। रामायण और महाभारत की कहानियों को चित्रित करने के लिए नर्तक इस नृत्य रूप का प्रदर्शन करते हैं।
डोमकच: यह छोटानागपुर क्षेत्र का एक विशिष्ट नृत्य भी है। यह वर पक्ष की महिलाओं द्वारा किया जाता है।

समारोह
हजारीबाग में त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। यहाँ लोग त्योहार में  खरीदारी, भोजन, स्नैक्स और मौज-मस्ती का लुप्त बड़े चाव से लेते है। यहाँ स्थानीय मेले और छोटे-मोटे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आम हैं। यहाँ मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण त्यौहार हैं:

छठ पूजा: यह इस क्षेत्र में मनाए जाने वाले प्रमुख हिंदू पर्व है। यह पर्व सूर्य देव को समर्पित है। यह हर साल दो बार एक चैत और दूसरा कार्तिक मास में मनाया जाता है।

होली: होली रंगों का त्योहार है, जिसे लोग बड़े हर्षोल्लास और जोश के साथ मनाया।